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Wednesday, January 18, 2012

हे रे चन्दा


"हे रे चन्दा"

हे रे चन्दा लेने जो सनेस पिया परदेश रे..........चन्दा....।
तोहें ने उगै छ आन्हर राति
बिसरल रहै छी पिया केर पाँती
तोंहे जाँ उगै छ दीया बाती दीया बाती
होइये मोन मे कलेश रे ...........चन्दा...... ।

हम्मर दुःख केयो ने बुझैया
कोना ओ रहै छथि केयो ने कहैया
कहियौन्ह विकल छैन्ह हुनकर दासी हुनकर दासी
रुसल किए छथि महेश रे ...........चन्दा....... ।

-लल्लन प्रसाद ठाकुर- 

Monday, January 24, 2011

मधुर मधुर बाजय बाँसुरिया रे !!


"मधुर मधुर बाजय बाँसुरिया रे "

- लल्लन प्रसाद ठाकुर -


मधुर मधुर बाजय बँसुरिया रे नाचे गोपी बाला
गोपी बाला गोपी बाला गोपी बाला ...
मधुर मधुर बाजय ............... ........


कान्हा जी के बाँसुरी के तान निराला
तान निराला कान्हा तान निराला
मन के मोहे इ बँसुरिया रे मन के मोहे इ बँसुरिया रे नाचे गोपी बाला
मधुर मधुर बाजय ....................


बँसुरिया सुनि सुनि राधा मन डोले
राधा मन डोले कान्हा राधा मन डोले
राधा के तों कान्हा रसिया रे राधा के तों कान्हा रसिया रे नाचे गोपी बाला
मधुर मधुर बाजय .......................


कखनो के राधा सोचथि बाँसुरी सौतनिया
बाँसुरी सौतनिया कान्हाँ बाँसुरी सौतनिया
मुख सँ लगौने गोसैंया रे मुख सँ लगौने गोसैंया रे नाचे गोपी बाला
मधुर मधुर बाजय ..............................

Tuesday, January 12, 2010

दिल धड़कल आँखि फरकल

" दिल धड़कल आँखि फरकल "


दिल धड़कल आँखि फरकल
खाइते काल में सरकल
भोरका गाड़ी सँ आबि रहल छथि
घर वाली घर वाली
भेंटत काल्हि सँ फेरो
आलुक साना पाइन सन दालि
सबटा रोटी झरकल
दिल धड़कल ...........

काल्हि सँ फेर हाथ में झोरा
बौआ रहता हमरे कोरा
देवी जी आगू आगू
चाकर हम पाछू पाछू
जीप के पाछू में टेलर
जाइछै जेना गुड़कल
दिल धड़कल ...........

मौज छल कत्ते कहे छी सत्ते
होटल सिनेमा रोज अलबत्ते
सांझ छल आला कतेको बाला
अर्ध परिधान में देखय वाला
देवी जी के लटकल ठोढ़
आँखि सँ सदिखन झहरैत नोर
कोनो पहाड़ सँ झरना
जाई छै जेना झहरल
दिल धड़कल ..........

नैहरक गुणगान एकेटा तान
छेरि छेरि क खेती कान
बाप हमर इ देलैंह अहाँ बूते की भेल
आई धरि एकोटा सारियो ने किनी भेल
देवी जी के दुर्गा रूप
फज्जहति सुनियो करय छथि चुप
करेजा हम्मर फाटय जेना
कैंची सँ फाटय मलमल
दिल धड़कल .............. ।

- लल्लन प्रसाद ठाकुर -



Tuesday, December 22, 2009

मैथिली माँझी गीत

" माँझी गीत "

- लल्लन प्रसाद ठाकुर -


हैया रे हैया रे हैया हैया रे, हैया रे हैया रे हैया हैया रे ----
लहरि उठल छमाछम हवा चलल सनन सन ,
मयुर मन नाचि उठल सावन में संग संग, अहाँ आओर हम अहाँ आओर हम
हैया रे हैया रे हैया रे .............................


संग हमर मीत हमर माँझी के गीत हमर
नदिया के जल सन निर्मल पिरीत हमर
यौवन के चढ़ल रंग सावन में संग संग, अहाँ आओर हम अहाँ आओर हम
हैया रे हैया रे हैया हैया रे ....................


सावन के रंग में सजनी नहायल
घुँघरू छमकी उठल झनकी उठल पायल
थिरकी रहल अंग अंग, सावन में संग संग, अहाँ आओर हम अहाँ आओर हम
हैया रे हैया रे हैया हैया रे .....................


पिया बिनु चैन कहाँ चान बिनु रैन कहाँ
माँझी तों लेने चल प्रेमक हो देश जहाँ
बिरहा के फुजल अगन सावन में सँग सँग अहाँ आओर हम अहाँ आओर हम
हैया रे हैया रे हैया रे .........................





Sunday, December 20, 2009

मैथिली गीत !

"मधुर मधुर बाजय बाँसुरिया रे "

- लल्लन प्रसाद ठाकुर -


मधुर मधुर बाजय बँसुरिया रे नाचे गोपी बाला
गोपी बाला गोपी बाला गोपी बाला ...
मधुर मधुर बाजय ............... ........


कान्हा जी के बाँसुरी के तान निराला
तान निराला कान्हा तान निराला
मन के मोहे इ बँसुरिया रे मन के मोहे इ बँसुरिया रे नाचे गोपी बाला
मधुर मधुर बाजय ....................


बँसुरिया सुनि सुनि राधा मन डोले
राधा मन डोले कान्हा राधा मन डोले
राधा के तों कान्हा रसिया रे राधा के तों कान्हा रसिया रे नाचे गोपी बाला
मधुर मधुर बाजय .......................


कखनो के राधा सोचथि बाँसुरी सौतनिया
बाँसुरी सौतनिया कान्हाँ बाँसुरी सौतनिया
मुख सँ लगौने गोसैंया रे मुख सँ लगौने गोसैंया रे नाचे गोपी बाला
मधुर मधुर बाजय ..............................




Tuesday, November 24, 2009

मैथिली गीत

सब एलय फगुआ में सजना ,
अहाँ बिना मोर आँगन सूना ।
सब एलय ............................।
चतुर्थिक राति अहाँ पढिते रहलहुँ ,
भोरे उठि कs अहाँ चलि देलहुँ ।
चिट्ठियो नहि देलहुँ खबरियो नहि लेलहुँ ,
जाइत काल एकोटा फोटुओ देलहुँ ।,
इहो नहि बुझलियय हम जीबय कोना ।
सब एलय ...................... ।
खूब पढू खूब पढू खूब पढू यौ ,
कखनो कs हमरो बिचारि करू यौ ,
लाल काकी के जोड़ा बेटा भेलैंह ,
सौंसे गामे के ओ भोज केलैन्ह ,
अपन कर्मक लिखल के मेटत के ,
ककरो एकोटा नहि ककरो भेंटय दूना ।
सब एलय ...................... ।

- लल्लन प्रसाद ठाकुर -

Tuesday, June 9, 2009

मैथिली गीत

अहाँ हमर के छी ......२
स्वप्नक रानी प्रेम दिवानी
कोयल छी अछि पंचम वाणी
अहाँ हमर ............... ।
नयन अहाँ केर प्यासल प्यासल
काजरि सँ अछि सुन्दर साजल
डूबि कs देखि अथाह समुन्दर
अधलाह जँ ने मानी
अहाँ हमर ............. ।
ठोढक लाली मय केर प्याली
सोरहो बसंतक छी हरियाली
चंद्रमुख ई चमक रहल अछि
चमकय जेना चानी
अहाँ हमर ............ ।
धवल अंग पर कारी साडी
प्रेमक भौँरा अंग निहारी
अंगक रस हम पीबि रहल छी
आँख करय मनमानी
अहाँ हमर ............. ।
प्रणय गीत हम गाबि कहय छी
ह्रदय मे बस अहिं रहय छी
एक भs जाय दिय दुनु केर
बात हमर जँ मानी
अहाँ हमर .......... ।

गीतकार : लल्लन प्रसाद ठाकुर

Saturday, May 16, 2009

मैथिली गीत

मैथिली गीत


हे रे चन्दा लेने जो सनेस पिया परदेश रे..........चन्दा....।
तोहें ने उगै छ आन्हर राति
बिसरल रहै छी पिया केर पाँती
तोंहे जाँ उगै छ दीया बाती दीया बाती
होइये मोन मे कलेश रे ...........चन्दा...... ।

हम्मर दुःख केयो ने बुझैया
कोना ओ रहै छथि केयो ने कहैया
कहियौन्ह विकल छैन्ह हुनकर दासी हुनकर दासी
रुसल किए छथि महेश रे ...........चन्दा....... ।

-लल्लन प्रसाद ठाकुर-

Friday, May 15, 2009

मैथिली गीत

मैथिली गीत


मोन ने लागय अहाँ बिना,
चैन न आबय निश दिना,
मोन ने लागय ............... ।

बीतल दिन सब मोन परैया
रही रही कs हिय चिहुँकी उठैया,
सपना छल जे टूटि गेल अछि,
बिसरब हम कोना ........
मोन ने लागय .......... ।

घनघोर घटा छायल छल नभ मे,
पायल छल अहाँ पग मे,
छम छम छम छम बाजी रहल छल,
थिरकय मोर जेना,
मोन ने लागय................. ।

जीवन हम बितायब सँग सँग,
वचन अहाँ स लेने रही हम,
बैरी जग के नीक ने लगलय,
पनिसोखी के मेघ जेना,
मोन ने लागय अहाँ ........... ।

-लल्लन प्रसाद ठाकुर-