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Thursday, May 20, 2010

चंदा (एकांकी)

"चंदा "

एक साधारण नौकरीहारा व्यक्ति एवम उसकी पत्नी .....दरवाजे पर दस्तक 

प्रथम व्यक्ति (सँग में दू तीन गोटे ) - औ विजय बाबू छी यौ...... । विजय बाबू .....
(विजय बाबू घर सँ निकलैत छथि , पाछू पाछू हुनक पत्नी )

विजय  - जी अपने लोकनि के चिन्हल नहि ?

दोसर व्यक्ति -  औ जी चन्ह्बय कोना .. । ऑफिस सs आबि तs अहाँ घरे में सन्हियेल रहय छी तs चिन्हबय कोना ।

तेसर व्यक्ति - छोडू इ सब गप्प कुमार जी बाबू ...औ जी हमरा लोकनि परमहंस लक्ष्मीनाथ गोसाईं मंडली सँ आयल छी । विशाल स्तर पर एहि बेर मिथिला महोत्सव करबाक नेयार कयने छी ।

पहिल व्यक्ति - जगन्नाथ जी मुख्य अतिथि रहताह । रामेश्वर ठाकुर जी विशिष्ट अतिथि , आ कि कहय छे जे धनिक लाल मंडल जी प्रमुख अतिथि ।

विजय - वाह इ तs प्रसन्नताक गप्प थिक ।

दोसर - तs एहि लेल अपनेक सहयोग चाहि ।

विजय - जी कहल जाय कि सहयोग चाहि ।

दोसर - औ जी कतs घर अछि.......सहयोगक अर्थ नहि बुझय छियैक ?......सहयोग माने चन्दा ।

विजय - चन्दा .......

चारिम - कि भs गेल यौ ........सा रे गा म प ध नी सा जकाँ कहलियैक चन्दा ..................

विजय  - जी किछुं नहि नेने अबैत छी (भातर जाइत छथि )

पहिल - पाँच  टाका...

दोसर - मात्र पाँच टाका....

तेसर - पाँच टाका केवलम

विजय  - जी हमर इयैह ओकाइत अछि ।

चारिम -  कि कहैत छी यौ ..........अहाँक औकाइत के नहि जानैत अछि ।

दोसर - जाती हज़ार पाँच हज़ार सोचि कs आयल छी ओहि ठाम पाँच टाका मात्र ।

चारिम - औ जी कुमर जी बाबू बुझा गेल .......जखने चलबाक समय बिलाडि रास्ता काटी देने रहैक त बुझा गेल छल जे अजुका जतरा ठीक नहि .....यैह यौ विजय बाबू कम स कम ५१ टाका दियौ.....एहि सs कम में काज नहि चलत । 

विजय - ५१ टाका ....? इ त हमरा बहुत भारी परत आ हमर घरवाली ......

पहिल - घरवाली ......एहि ठाम सेहो घरवाली । यैह ठीक मिथिलावासिक सब सँ पैघ बिमारी ......बिना घरवाली सँ पूछने मिथिला महोत्सवक चंदो नहि दs सकैत छथि ।

दोसर - आ काका एकटा छलाह मैथिल कवि विद्यापति .....घरवाली के कनिको मोजर नहि दैत छलाह ......कतेको बरख तक इ नहि कहलाह जे उगना महादेव स्वयं छलाह ।

चारिम - औ जी कने हुनको मान मर्यादाक ख्याल राखू .....जाऊ ....५१ टाका नेने आऊ ।

(विजय मोन मसोसि कs भीतर जाइत छथि आ ५१ टाका आनि कs दैत छथि । आ वापस जाय कs कुर्सी पर बैस जाइत छथि ।  पत्नीक प्रवेश )

पत्नी - एना जँ चन्दा देबय तs भरि मास खायब कि ?

विजय - एखैंह हमर दिमाग खराब जुनि करू ......हम अपने बहुत परेशान छी ......जाऊ चाह बना कs नेने आऊ ।

( पत्नीक प्रस्थान । पार्श्व सँ एकटा हारमोनियम ढोलक वाला क सँग प्रवेश )

उडिया -  छिता रामो ...छिता रामो ....छिता रामो ....छिता रामो 

विजय - सुनैत छी यै.....कने देखू तs के अछि.......

पत्नी  - के होयत फेर कोनो चन्दा वाला 

विजय - चन्दा वाला .........


पत्नी - आर नहि तs की अहाँ के फ़ोकट में गीत सुनबय आयल अछि ।


विनय - औ ठहरू हमरा देखय दिय ।


पत्नी - जी नहि ....अहाँ चुप चाप बैसू .....हमरा देखय दियs ।
अहाँ त फेर १०१ टाका द देबय ।
( पत्नी बाहर उडिया लग पहुँचि क)
पत्नी -क्या है.....? 


उडिया - मोँ आश्रम के लिए चन्दा दो मोँ।


पत्नी   - आश्रम के चन्दा.... अभी पछिला रवि दिन तs ले गया है चन्दा ......


उडिया - ओ कोई दूसरा आश्रम होगी मोँ ....हम तs पहली बार आई है मोँ ।


पत्नी - नहि नहि जाइए ....एतय सँ ....फेरो कहियो बाद में आइएगा ।


उडिया - माँ .....दे दो माँ ...तेरा बाल बच्चा जुग जुग जियेगी माँ .......आश्रम को दे दो माँ ।


पत्नी (स्वतः ) - सरधुआ नय देबय त गारोयो तारियो नय पढि दिये।


उडिया - क्या बोला मोँ.....


पत्नी - कुछो नहीं ....रुकिए (भीतर जा क २ टाका कs नोट आनैत छथि )


उडिया  - दू टाका मोँ .....मात्रो दू टाका ...


हारमोनियम वाला - टाका (हाथ सँ छिनैत ) दू टाका में तो बीडी का एक बंडल भी नहि आएगा 


पत्नी - क्या अहाँ सब इस पैसे से बीडी पिएगा ...(टाका हाथ स छिनैत ) जाइए दूसरा घर देखिये ।


उडिया - (पुनः रुपैया छिनैत ) इ त बेवकूफ है मोँ .....कुछो समझता नहीं है (छिता रामो ....करैत प्रस्थान )


पत्नी - (बड़बराइत ) ई आश्रम के नाम पर चन्दा आ पियत बीड़ी ।


विजय - की भेल ये........कते में फरियायल ।


पत्नी - मात्र दू टाका अहाँ जकाँ ५१ टाका में नहीं ओह ....चहक पानियो जरी गेल होयत ।


विजय - छोडू चाह ....आबि क पीयब .....लाऊ झोडा पहिने तरकारी आनि दी ......हे आई आधा किलो दूध बेसी आनि देने छी .....कने काजू किसमिस दs कs बढ़िया सँ खीर बनाऊ ।
(प्रस्थान )


(बाहर सँ पहलवानक आवाज )
पहलवान - इकबाल बुलंद होखे साहेब के ...जाय बजरंगबली.....


पत्नी - (भीतर सँ ) कौन ...?


पहलवान - तानी दरबज्जा त खोलीं माई .....राउर इलाका में नाम रौशन करेबाला .....मुख्यमंत्री लालू यादव के हाथ से पुरस्कार प्राप्त हुरदंग पहलवान राउर दरबज्जा पर आइल बा।


(पत्नी बाहर आबैत छथि)


पहलवान - जाय बजरंगबली के माई ........माई ई पहलवान सरायकेला में होय वाला आल इंडिया कुश्ती में भाग लेवे जा रहल बा ....सौ दू सौ रुपैया दीं माई .....जे खा पी के ......सरवा सब पहलवान के उठा के पटक दी ......


पत्नी - (स्वतः ) सौ दू सौ .....आरौ बाप रे .....
देखिये ....साहब एकैन्ह नहीं हैं बाजार गए हैं ....एक घंटा बाद आइए ।


पहलवान - एक घंटा बाद ......माई एक घंटा में त केतना पहलवान के उठा के पटक दिहिले हम ...........राजा नैखिं त का रानी त बारी ...........


पत्नी - देखिये सब पैसा कौड़ी उहे रखते हैं तs हम कतs सs देंगे ।


पहलवान - का कहतें हैं माई ....राउर इ बात में त हमरा डाउटे लागता .....आजकल त घरे घर मेहरारू के राज चलता ।


पत्नी - अरे आप विश्वास काहे नहीं करते हैं .....एक घंटा बाद आइए 


पहलवान - अच्छा छोड़ी माई ......ई पहलवान के एक लीटर दूधे पिला दिन ...........सेहत बने में मदद करी ।


पत्नी - दूध ....अरे उ तो बच्चा के लिए है और खीर के लिए ।


पहलवान - रौआ कैसन बात कर तानी माई ....एक दिन बच्चा के दूध न मिली त मर ना जाइ ..... आ खीर त दोसरो दिन खा सकिले .....हल्दी करीं ......टेम बर्बाद जुन करीं 
(पत्नी डरे जा क दूध आनि द दैत छथिन्ह .......पहलवान दूध पी जाइत अछि , मुँह पोछैत .....जाय बजरंग बलि कहैत प्रस्थान)
(पत्नी माथ पकिर क बैस जाइत छथि )
(पतिक प्रवेश )

विजय - एना मुँह कियैक लटकल अछि ये फुचुक रानी .....देखू तरकारी सब आनि देलहुँ.......लाउ जलखई लाउ बड़ जोर सँ भूख लागल अछि ........आय कतेक दिन पर खीर खायब ।

पत्नी - खीर कि खायब ...कप्पार ....सब्त दूध पी गेल ।

विजय - दूध पी गेल .....?

विजय - दूध पी गेल अहाँ के काजे अहिना होइत अछि .....भनसा घरक दरबज्जा ओहिना खुजले छोरि देने होयबय....त पित नहीं त कि ........एक पाई घरक खेयाल नहि ........कतेक मोन छल आय खीर खयबाक  ।

पत्नी - ओफ .....हम कहैत छी जे पहलवान दूध पी गेल 

विजय - हाँ हाँ ....हमहू  बुझैत छियै जे एहि इलाका के सब मूस आ बिलारि पहलवाने सन सन होइत छय.....एना जँ खुल्ला छूट भेंटतय आ लीटर के लीटर दूध पियत त पहलवान नहि होयत त की ।

पत्नी - अहाँ बुझैत कियैक नहि छी ।

विअजय - हम की बुझबय ....बुझियौ अहाँ ....ओह आई खीर खयबाक कतेक इच्छा छल ....एक त भोरे सँ चन्दा वाला सब ताहि पर सँ इ बज्रपात ।

पत्नी - हे भगवान ...अपने सुर में बजने जा रहल छथि ......हिनका के बुझाबय ......
(भीतर जाइत छथि आ एकटा ताला चाभी आनि क दैत छथि )
आब एको त के चन्दा नहि देबय ........हे लिय बाहर सँ ताला लगा दियोक आ पाछू सँ चलि आऊ ।

विजय - अरे कय दिन एना दरबज्जा बंद करि क रहब आ .....बाहरक दरबज्जा बंद क बेबी तs कि बिलारि नहि घुसत ......

पत्नी - ओह फेर वैह बात .....हे ये .......कोनो दोसर मोहल्ला में घर ताकि लिय ......

विजय - दोसर मोहल्ला ? हे ये कोन मोहल्ला एहि सँ बांचल अछि .....हाँ एकटा काज कs सकैत छी.....नौकरी तौकरी छोडि कs सासुर में डेरा जमा दैत छी .....तखैंह कोनो चन्दा वाला तंग नहि करत ....उनटे अहाँक बाबुजी सँ हमही मंथली चन्दा माँगैत रह्बैंह .....

पत्नी - दूर......अहाँ के तs सदिखन मजाके सुझैत अछि ....जाउ ताला लगा दियौ .......आई छुट्टी के दिन तs आराम सँ बितत।
(विजय जहिना ताला लगाबय के उपक्रम करय छथि एकटा तेलगू भाषी केर एक हाथ में रजिस्टर लेने प्रवेश )

तेलगू - नमस्कार श्री मान .....लगता है आप कहीं जाने वाले हैं .....आपका ज्यादा समय नहीं लूंगा ....मैं आंध्रा का रहने वाला हूँ .........हमारा घर बार परिवार सब बाढ़ में बह गया ......कुछ नहि बचा ....आप कुछ मदद कीजिये ।(और भी कुछ कुछ तेलगू में बोलता है )

पत्नी - के आयल अछि .......(कहैत बाहर आबैत छथि )

विजय - भाई साहब आप क्या बोले हम कुछ नहीं समझे ।

तेलगू - हिन्दी आप हिन्दी ?

पत्नी - मैथिली हम मैथिली 

विजय - ओह अहाँ चुप रहू.......हाँ हम हिन्दी 

तेलगू  -मैं आंध्रा का रहने वाला हूँ .........हमारा घर बार परिवार सब बाढ़ में बह गया ......कुछ नहीं बचा ....आप कुछ मदद कीजिये ।

विजय - भाई साहब मेरे पास चन्दा देने को कुछ नहीं है ......जाइए दूसरा घर देखिये ......

तेलगू - ऐसा मत कहिये भाई साहब .....अमां ....तुम तो समझती है ......कुछ नहीं बचा .....एक बीबी .....८ बच्चा .....४ बकरी .....२ भैंस .....२ कुत्ता ....सब था कुछ नहीं बचा .....तुम दयालु माँ ......तुम दयालु ....मदद करो .....

विजय - भाई साहब हमने कहा नही दूसरा घर देखिये ....

पत्नी - हे एना नहीं कहियौ ....देखियौ बेचारा के कि हाल छय ......सबके चन्दा दैत छियै ...एकरो किछु मदद करियौ ...

तेलगू - माँ ठीक बोलती है भाई साहब ....मदद करो 
(रजिस्टर बढ़ा दैत अछि )


विजय - (रजिस्टर उलटैत ) हूँ ......की मदद करबय .....इ सब ढोंगी अछि .......देखियौ की लिखल छैक बगल वाला शर्मा जी के नाम पर ५०० रु.......भाई साहब इ शर्मा जी आपको ५०० रु. दिया है  ।

तेलगू - हाँ 

विजय - (डाँटेत) - सच सच बोलिए ....नहीं तो अभी शर्मा जी को बुलाता हूँ ।

तेलगू - (डराइत ) ५ रुपैया दिया २ जीरो हम अपना तरफ से लगाया ।


विजय - बुझालिये यैह धंधा छैक एकर ......बाढ़ी ताढी किछु नहि भेलैक इ एहि शहर के रहय वाला होयत झूठ बाजैत अछि  ........सुनिए आप यहाँ से जाते हैं कि.........


तेलगू - अम्मा अम्मा हम झूठ नहीं बोलता
(गिरागिराबय लागैत अछि)


पत्नी  - हे देखियौ कोना कानैत अछि .....दs दियौक २ टाका अहुँ ।


विजय - आ लिखी दियौ ५०० टाका ......लीजिये भाई साहब .....इ औरत सब के चलते ही आप लोगों को बढ़ावा मिलता है ........घर चलु आ ताला बंद कs दियौक।


तेलगू - धन्यवाद .....धन्यवाद ....मगर भाई साहब इतना गुस्सा ठीक नहीं .......अम्मा के जैसा दयालु बनिए ......अम्मा तुम तो लक्ष्मी है और तुम्हारा ये आदमी.....।


विजय - अब आप फूटते हैं यहाँ से कि .....


तेलगू - जाता भाई जाता काहे गरम होता .....
(प्रस्थान)

विजय - हूँ आब केकरो चन्दा नहीं देबय ....बाहर सँ ताला लगा दैत छियैक ....नहीं जानि आय केकर मुँह देखि क उठल रही ।

पत्नी - हम्मर 

विजय - तैं इ हाल भेल 

पत्नी - की कहलौं .....हमर मुँह कि खराब अछि ....

विजय - नहीं अहाँ तs चौहदवीं के चाँद छी 
(ताबैत तीन चारि युवक केर प्रवेश) 

पहला व्यक्ति - एकदम ठीक कहा आपने भाई साहब ....भाभी तो एकदम चौहदवीं का चाँद हैं ।

दूसरा व्यक्ति - अबे क्या कहता है भाभी तो श्री देवी हैं श्री देवी ।

विजय - अहाँ भीतर जाउ ।

तीसरा व्यक्ति - काहे भीतर जाने को कहते हैं भाभी को हमलोग कोनो उठा के थोड़े ले जाएँगे ।

चौथा व्यक्ति - भौजी से तनी दूगो मीठा मीठा बाते न करेंगे ....त इसमे आपका क्या घट जायेगा ।

विजय - अरे ....अहाँ जाय कियैक नहीं छी ......जाउ ।
(प्रस्थान) (चारों का ठहाका )

पहला व्यक्ति - अरे अरे उनको भगा दिया त अब बचा ही क्या है .....

दूसरा व्यक्ति - (कान में) लंगूर...
(चरों फिर ठहाका लगाते हैं)

विजय -  तमीज़ से बात कीजिये ....किसी सभी आदमी के घर कैसे बात की जाती है इतना भी नहीं जानते .....


तीएसरा व्यक्ति - अरे ...अरे ....नाराज़ काहे होते हैं भाई साहब .....इतना तमीज़ से तो हम लोग पहली दफा बोल रहे हैं ।


विजय - अच्छा अच्छा ....बोलिए ?


चौथा व्यक्ति - क्या बोले .....शाला मूड तो ओफ कर दिया........निकालिए चन्दा ।


विजय - चन्दा .....किस चीज़ का.....


पहला व्यक्ति - चीज़ का नहीं पूजा का 


दूसरा व्यक्ति - पूजा का ...किस पूजा का


तीसरा v यक्ति - ओ भाइ साहब कोनो पूजा समझ लीजिये काट दो भाइ २५० रु. का रसीद ।


विजय - २५० रु. का .......देखिये एक तो दादागिरी कर रहे हैं ऊपर से चन्दा .......हम चन्दा फंदा नहीं .......जाइए आप लोग 


पहला व्यक्ति - सुनो भाइ ........इ चन्दा फंदा नहीं देंगे 


दूसरा व्यक्ति - अरे का कहते हैं भाई साहब यहाँ तो मंथली चन्दा देता है सब आप से तो वार्षिक मांग रहे है .....दे दीजिये वरना ....


विजय - वरना क्या .....हम कहा न नहीं देगें ......जाइए जो मन में आए सो कर लीजिये 


तीसरा व्यक्ति - चलो भाई लोग .....इ नहीं देंगे तो का कर लेंगे ....हमलोग चलो ।


चौथा व्यक्ति - चलते हैं चलते हैं ...तनि देक्ग ले की गोलिया बचा है कि नहीं ...
(पिस्तौल निकालकर गोली देखता है और फूंक मारता है ) तो भाई साहब चलें हमलोग  ?


क्रमशः ......

Tuesday, June 2, 2009

मैथिली एकांकी

श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर अपन प्रत्येक नाटक s पहिने बच्चा सब s एकटा एकांकी करबैत छलाह एकांकी सेहो अपनहि लिखैत छलाह ओहि एकांकी में s एकटा अछि:

ग्रीन रूम

(परदा फुजैत अछि। मेक अप मैन लग भिखमंगाक मेक अप भs रहल अछि। एक कात मे डाँसर डाँस कs रहल छथि । एक दिस आओर कलाकार सब जे मेक अप कs चुकल छथि हुनकर सबहक माय मदत कs रहल छथिन।)
(डाइरेक्टर प्रवेश....... डाँसर लग। गायक गाबि रहल छथि )


डाँसर - ठुमकी चलत राम चंद्र बाजत पैजनियाँ ठुमकी चलत राम चन्द्र ......
डाइरेक्टर - ओफ्फोह एना नै .....एना करियौ ।
डाँसर - नै हम तs एहिना करब ।
डाइरेक्टर - अरे हम अहाँ के की सिखेने छलौं आ अहाँ ...बिसरी गेलियै सब।
डाँसर - ईह बिसरबै कियाक, मुदा हम ओना नै करब। ओना कतौ डाँस भेलैये ।
डाइरेक्टर - हे भगवान , अरे राजाक दरबारक सीन छै ओई मे एना कोना डाँस करबै।
डांसर - राजाक दरबारक सीन छै तs की भs गेलै , ओई सिनेमा मे नै देखने रहियै जे हेमामालिनी कोना डाँस करैत छलै ।
डाइरेक्टर - ई हेमामालिनीक डाँस नै छै। हम जेना सिखेने रही तहिना करू। आब नाटक शुरू हेतै आ अहाँ उलटा सीधा ...... ।
डाँसर - हमरा अहाँ डाँटैत कियैक छी यौ। मम्मी मम्मी ....देखियोन तs ई हमरा कोना कs डाँटैत छथि।
मम्मी - की भेल बेटी ? कियाक डाँटैत छियै यौ डाइरेक्टर साहेब। कहू तs हमर फूल सनक बेटी एतेक मेहनत सँ अहाँक ड्रामा कs रहल अछि आ.... ।
डाइरेक्टर - हमर ड्रामा कीने ?
मम्मी - और नै तs की। तैं अहाँ डाँटबै।
डाइरेक्टर - ओफ्फोह हम डाँटि कहाँ रहल छियै हम तs दुलार कs कs बुझा रहल छियैन। बौआ...
डाँसर - इह बुझबै छथि, मुदा सुनि लिय हम हेमामालिनी जोकाँ डाँस करब।
डाइरेक्टर - हँ हँ......अवश्य ....जेना मोन हो तेना करू .....होऊ .....करू....।
( मेक अप मैन लग सs भिखमंगाक स्वर )
भिखमंगा - कने हमर मेक अप देख लिय औ डाइरेक्टर साहेब ....
( डाइरेक्टर जा कs मेक अप देखैत छथि )
डाइरेक्टर - वाह वाह बहुत सुन्दर। मुदा केश एना कियैक केने छियैन्ह यो मेक अप मैन।
मेकप मैन - हिनकर भिखमंगा के ने रोल छैन्ह।
डाइरेक्टर - अयँ.....हँ ...हिनकर तs भिखमंगाक रोल छैन्ह। अयँ यौ तs इ राजकुमार बला ड्रेस कियाक पहिरने छी।
भिखमंगा - मम्मी कहलनि अछि इएह पहिरवाक लेल।
डाइरेक्टर - डाइरेक्टर मम्मी छथि कि हम। हम अहाँ के फाटल चिटल कपडा अनबा के लेल कहने रही । उतारू ..उतारू ...।
भिखमंगा - मम्मी....मम्मी...देखियोन इ हमरा फाटल कपडा पहिरय कहैत छथि
भिखमंगाक मम्मी - कियैक यौ ....कियैक कहैत छियै हमर बेटा फाटल कपडा पहिर s नाटक करत, की हमरा औकात नञ ?
डाइरेक्टर- नै नै ......दरअसल .. भिखमंगा रोल ने s रहल छथि ...s तै हिसाबे ड्रेस पहिरs परतैनतै कहलियैन जे उतारि s फाटल चिटल ....।
भिखमंगाक मम्मी - फाटल चिटल ....कथमपि नै करत इएह ड्रेस पहिर s करत नाटक अँ यौ जखैन भिखमंगा जकाँ एक्टिंग करतय s की लोक नै बुझतय जे भिखमंगाक रोल कs रहल अछि करिही s रौ बौआ कोना s करबहि
(भिखमंगा एक्टिंग करैत अछि )
भिखमंगा - गरीब लाचार के दू टा पाई s दिय, भगवान अहाँ के भला करताराजा के रंक बनौता ...रंक के राजा
भिखमंगाक मम्मी -देखियौ s केहेन सुन्दर भिखमंगा लगैत छै
डाइरेक्टर - हाँ..... बड.. सुंदर ......बड सुंदर.....।

( ताधरि दोसर दिस एकटा मुंशी जी चश्मा पहिर s चलबाक प्रयास करैत खसि परैत अछि माँ माँ कहि कानय लागैत छथि )

डाइरेक्टर - ओफ्फोह .....आब हिनका की भेलैन्ह। ( बढ़ि कs देखैत ) अहाँके की s गेलकियाक माँ माँ चिचिया रहल छी
मुंशिक मम्मी - कियाक यौ हमर बेटा की आन्हर अछि जे आन्हर s रोल करतओकरा s अहाँ मुंशी जी रोल करबैत रहियै?
डाइरेक्टर - मुंशी जी ...अरे हाँ मुदा चश्मा के आनय कहलक, ......देखू चश्मा
मुंशी - (चश्मा दैत ) अहीं s कहने रही ....जे मुंशी रोल मे चश्मा रहबाक चाही
डाइरेक्टर - यौ हम तs कहने रही जे कोनो बिना पावर चश्मा लगेबाक लेल, अहाँ जे चश्मा अनलौं अछि ताहि मे s खाली पावरे पावर अछि केकरा s अनलौं चश्मा?
मुंशी - बाबा के छैन्ह
डाइरेक्टर - बाप रे बाबा परबाबा चश्मा आनब तs आओर की हैतहटाऊ चश्मा के
मुंशिक मम्मी () - अँ यौ अहाँ अपना के की बुझैत छियै, डाइरेक्टर नय भs गेलौ जे.....हमर बेटा मुंशी रोल करैत अछि तैं अहाँ ओकरा डँटबय नै करत ड्रामा नै करत ड्रामा बिना भूखल नै मरल जा रहल अछि
डाइरेक्टर - हे भगवान हम कतय फँसि गेलौं बहिनजी एना तामस ठीक नै आब नाटक शुरू हेबा मे मात्र आधा घंटा रहि गेल अछि जेना मोन हो करs दियौ , बाबा वाला चाहे परबाबा वाला जे चश्मा पहिर s जएबाक मोन हो जाय दियौ हम की कहि सकैत छी आओर
मुंशिक मम्मी - ठीक छै यैह पहिर s जहिए रे बौआ कर अपन रिहर्सल कर
मुंशी - ठीक छै मम्मी (फेर चश्मा पहिर कs चलैत अछिदू डेग चलैत अछि खसि परैत अछि )
डाइरेक्टर - (आगू बढैत छथि s रानी के मुकुट लगौने देखैत छथि ) अहाँ ...अहाँ मुकुट ....? ......अहाँके s रानी रोल करबाक अछि
रानी - हाँ
डाइरेक्टर - हे भगवान ...हम बरबाद भs गेलौं
यै अहाँक रानिक रोल ...... एहेन साडी खूब नीक साडी अनबाक लेल कहने रही ने देखू s ...देखू s... अहाँ रानी लागि रहल छी कि नोकरानी ?
रानी - s हम की करियै .... मम्मी कहलखिन नाटक ताटक के लेल नीक साडी नय देब सैह अछि तs डाइरेक्टर साहेब के कहबैन जे कीन s देता
डाइरेक्टर - कीन s हम आनि दियठीक छै ....ठीक छै ....जे मोन हुए से करू अहाँ लोकनि आय तs हमर नाक कटले अछि
भिखमंगा - हें हें हें हें हें हें ....हम सब नाटक करबै डाइरेक्टर साहेब के नाक कट
डाइरेक्टर - चुप गधा नहि तन
(गदा नेने सिपाहिक प्रवेश )
सिपाही - हेयै गदा।
डाइरेक्टर - गदा ! इ गदा .....इ गदा की हेतै तों ई गदा कियैक अनलैं। हम तs बाँसक तरुआरि आनय कहने रहियौ।
सिपाही - आब की तरुआरिक ज़माना छै ? ज़माना छै गदाक ......देखलियै नै रामायण मे हनुमान जी केहेन गदा सs मारि मारि क भुट्टम भुस्स कs देलखिन।
डाइरेक्टर - राजाक सिपाही ....आ इ गदा ..वाह रे डाइरेक्टर आइ अहाँक डाइरेक्टरी कमाल कs देत। वाह ....खैर ....इ राजा कतs छथि?
सिपाही - राजा ...के राजा ?
डाइरेक्टर - अरे वैह रमेश जे राजाक रोल करताह।
रानी - ओ तs बाथरूम गेल छथि।
डाइरेक्टर - ओ एतs नाटक करय एलाह अछि कि बाथरूम जाय लेल ?
मुंशी - ओ तs तखैन सs चारि बेर गेलाह अछि बाथरूम।
डाइरेक्टर - चारि बेर ?
भिखमंगा - आर नय तs की। जाई छथि अबै छथि.....हौआ देखियौन आबि गेला राजा साहेब।
( राजा के एकटा तौलिया लपेटने प्रवेश )
डाइरेक्टर - अहाँ ...अहाँ एतs नाटक करय एलौं अछि कि बाथरूम जाय लेल ?
राजा - बाथरूम
डाइरेक्टर - की ?
राजा - हमर पेट ख़राब भs गेल ।
डाइरेक्टर - हे भगवान आब की करी हम। यौ पेट ख़राब भs गेल छल तs कोनो दबाई तबाइ कियैक नै खा कs एलौं?
राजा - घर मे थोरे ख़राब भेल छल। जखने पाठ मोन पारय लागैत छी कि शंका होवय लागैत अछि। हमरा तs बड डर लागैत अछि।
डाइरेक्टर - नय नय डरबाक कोनो काज नय । हम छी नय ....डर के हटा दिय मोन सs तs देखू जे किछु नै हैत । आँय ठीक नय।
राजा --ठीक छै । आब सभ एमहर आऊ ...देखू सभ के अपन अपन पाठ मोन अछि कि नै।
सभ संगे - हाँ मोन अछि।
डाइरेक्टर - ठीक आब हम सभ एक बेर बढियां सs रिहर्सल करब। अखैन आधा घंटा समय छै नाटक शुरू हेबा मे।

( डाइरेक्टर कुर्सी तुरसी लगाबैत छथि )

डाइरेक्टर - हाँ आब शुरू भs जाऊ । अपन अपन जगह लिय। राजा अहाँ ओम्हर सs एबय आ रानी अहाँ एम्हर सs । सिपाही अहाँ एतय ठाढ़ रहू । OK..... ready .......start....।
सिपाही - होशियार खबरदार .....महाराज पधारि रहल छथि ।
(राजा तौलिया लपेटने आ एक हाथ सs तौलिया के पकड़ने अबैत छथि। )
राजा - हमर ...हमर ....मुकुट की भेल ?
डाइरेक्टर - ओफ्फोह ....अरे मुकुट बाद मे ताकब पहिने रिहर्सल जल्दी सs कs लिय। फेर अहाँक पूरा मेक अप बाँचले अछि। ओ हाथ हटाऊ तौलिया पर सs ........हटाऊ नै।
राजा - नै हटायब ...तौलिया जओं कहीं खसि परल तs।
डाइरेक्टर - ओफ्फोह हे भगवान। ......OK....OK.... चलु फेर सs आऊ।
सिपाही - होशियार ...........
(राजा आबि कs कुर्सी पर बैसैत छथि )
सिपाही - होशियार खबरदार ...महारानी पधारि रहल छथि ।
( रानी आबि कs दोसर कुर्सी पर बैसैत छथि। )
राजा - रानी आय अहाँ बड सुन्नरि लागि रहल छी।
रानी - महाराज आय अहुँ बड सुन्नरि लागि रहल छी।
( राजा बेचारा तौलिया सम्हारय मे लागल छथि )
भिखमंगाक मम्मी - करहि नै बौआ तों अपन पाठ । जो ....
मुंशिक मम्मी - ईह पहिने हमर बौआ करतय तखैन अहाँक बौआ । जो करही ने....
डाइरेक्टर - ओफ्फोह अहाँ सब तs चुप्प रहू । बहिन जी सब, माता जी सब ...कृपा कैल जाओ ....अहाँ सब कने काल। ओम्हर स्थिर सs बैसू।
भिखमंगाक मम्मी - कियैक यौ ...ओम्हर कियैक बैसू ...हमर बौआ नाटक करत आ हम सब ओतय बैसू। हम तs संगे रहबै।
डाइरेक्टर - की ?
मुंशिक मम्मी - हाँ हमहूँ अपन बौआक सँग रहबै।
डाइरेक्टर - हे भगवान ...इ नाटक भs रहल अछि कि .......आइ हमरा जूता चप्पल परबे करत। बेस आब जे हो। ठीक छै ....ठीक छै.....होऊ रिहर्सल करय जाऊ। हाँ तs किनकर पाठ छै।
(सब चुप्प )
हम पुछय छी जे किनकर पाठ छैन्ह।
( फेर स्क्रिप्ट निकालि कs देखैत छथि।)
राजा अहाँ के बजबाक छल।
राजा - हमरा...?.... हाँ.....हाँ....
डाइरेक्टर - त बाजू नै । चुप्प किया छी।
राजा -( याद करैत ).......बाथरूम.......बाथरूम
डाइरेक्टर - चुप्प ......बाजू अपन पाठ।
राजा - हाँ ...हाँ ...राज नर्तकी ......रानी के नृत्य करबाक आदेश दिय।
डाइरेक्टर - की ? Oh my God....आब हम की करी ? अरे अहाँक की डायलोग अछि आ अहाँ की बाजि रहल छी?
राजा - हम फेर सs बाजैत छी।
रानी राज नर्तकी के ......बाथरूम......
डाइरेक्टर - ओफ्फोह हम बर्वाद भs गेलौं ....ठीक छै ....ठीक छै....रानी अहाँ अपन पाठ बाजू।
रानी - राज नर्तकी नृत्य आरम्भ करू ।
(जहिना नृत्य शुरू होयेत छै, भिखमंगाक प्रवेश )
भिखमंगा - गरीब के......
राजा ........
मंत्री - इ.......इ..... भिखमंगा दरबार मे कतय सs आबि गेलै ......हम पुछै छी इ भिखमंगा दरबार मे कतय सs आबि गेलै।
(एक तरफ सs कतय सs आबि गेलै...........2 )
मंत्री - भिखमंगा तों कतय सs आबि गेलैं।
भिखमंगा - सरकार कलकत्ता सs ।
रानी - की ...? कलकत्ता सs। .....महाराज इ भिखमंगा हमर नैहर सs माने कि अहाँक सासुर सs आयल अछि।
महाराज - भिखमंगा जी अहाँ कि हमर सासुर के छी।
मंत्री - महाराज इ अहाँक सासुर आ नैहर करबाक जगह नै छै । इ अहाँक दरबार छी। भिखमंगा तों कलकत्ता सs एहि ठाम कोना कs एलाँ।
भिखमंगा - टिरेन सs सरकार ...टिरेन सs ।
मंत्री - ट्रेन के टिकट कटेबाक पाई कतs सs एलौ।
भिखमंगा - टिकस किया लेबै सरकार ......हम तs विदाउट टिकस अयलहुं।
राजा - विदाउट टिकट ....? तोहर मजिस्ट्रेट चेकिंग नै भेलौ ।
भिखमंगा - भेलै कि सरकार ...खूब भेलै । मजिस्ट्रेट पुछ्लकै तs हम कहि देलियै हम महाराज के भिखमंगा छी।
मंत्री - की..........? महाराज के भिखमंगा .....महाराज इ भिखमंगा अहाँक नाम लs कs घोर जुलुम केलक अछि। एकरा कठोर सs कठोर सजा भेटबाक चाही।
राजा - हाँ इ तs घोर जुल्म छै।
रानी - कि घोर जुल्म महाराज इ भिखमंगा हमर नैहर के अछि। इ अहाँक नाम कहिये देलक तs की भs गेलै। मुदा हे भिखमंगा जी ..तोरा कहये के छलौ तs कहितैं हम महाराज के सार छी।
भिखमंगा - आगू सs इयैह कहबै सरकार।
मंत्री - की ....? तो अपना के महाराजक सार कहबही।
भिखमंगा - ईह ...एना थोरे कहबै , कहबै ....गरीब लाचार .....इ महाराज के सार के दू पाइ दs दिय।
मंत्री - घोर जुलुम ....घोर जुलुम....महाराज इ नीच भिखमंगा के सजा अवश्य भेटबाक चाही।
राजा - ठीक छौ ...... भिखमंगा तोरा सजा देल जाइत छौ जे तों छौ मास तक भीख नै माँगि सकैत छें।(ताबैत......बाथरूम....बाथरूम )
डाइरेक्टर - चुप्प फेर बाथरूम।
राजा - नै नै ताबैत तोरा राजभवन सs भोजन आ वस्त्र भेटैत रहतौ।
भिखमंगा - एहेन जुलुम नै करियौ सरकार। यदि हम भीख नै मांगब तs खेबय कतय सs। पेट कोना चलत।
रानी - हाँ ..महाराज....यदि इ भीख नै मांगत तs खायत कतै सs ।
महाराज - हाँ से तs ठीके ..यदि भीख नै मांगत तs खायत कतै सs .....2।
(सब एक तरफ सs खायत कतै सs ......2?
( व्यवस्थापक मे स एक व्यक्तिक जलपान लेने प्रवेश )
व्यक्ति - लिय यौ डाइरेक्टर साहेब कलाकार सब के लेल जलपान।
डाइरेक्टर - ठीक छय ऊपर टेबुल पर राखि दियौ ।
(सब कलाकार जलपान दिस बढैत छथि )
एखैन नञ एखैन नञ ....पहिने रिहर्सल फेर जलपान...चलु चलु सब कियो.....हाँ तs हम सब कतय छलौं ....हाँ भिखमंगा के बाजै के छलै ...बाजु भिखमंगा।
भिखमंगा - बाबू ....बाबू...भूख लागल अछि ।
बाबू - जो जा कs खा ले ।
डाइरेक्टर - भाई साहेब इ की कs रहल छी।
बाबुजी - औ जी डाइरेक्टर साहेब हमर बच्चा के भूख लागल छै तs खायत नञ। भूखे पेट अहाँक नाटक कोना करत। (अपने निकालि कs दैत )
खाऊ लिय खाऊ ...भर पेट खाऊ बहुत नाटक करबाक अछि।
डाइरेक्टर - हे भगवान आब हम आत्महत्या कs लेब।
जाऊ अहुँ सब जाऊ।
(सब कलाकार दौड़ति अछि। राजा के डाइरेक्टर पकरि लैत छथि )
डाइरेक्टर - अहाँ कतs। तखैन सs बाथरूम बाथरूम आ आब....?
राजा - हमरा भूख लागल अछि।
लेखक : लल्लन प्रसाद ठाकुर