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Thursday, September 27, 2012

बरसों में एक फूल खिले !!



"श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर" 
एक बहु आयामी व्यक्तित्व की पुन्य तिथि पर भाव भीनी श्रधांजलि 

" गीत"

सब सपना बन के मिले, कोई अपना बन के मिले ।

सुख जब साथी होता है,
लाख सहारे मिलते हैं,
फूलों की फुलवारी में,
फूल हमेशा खिलते हैं,
विरानो के आँगन में ,
बरसों में एक फूल खिले।

सब सपना बनके मिले कोई अपना बन के मिले।

सुख की उजली राहों पर,
हर राही चल सकता है,
घर की चारदीवारी में,
हर दीपक जल सकता है,
गम की तेज़ हवाओं में,
कोई कोई दीप जले।

सब सपना बन के मिले कोई अपना बन के मिले।

आबादी में चैन कहाँ,
ऐ दिल चल तनहाई में,
शायद मोती हासिल हो,
सागर की गहराई में,
अपना कोई मीत नहीं,
धरती पर आकाश तले।

सब सपना बन के मिले, कोई अपना बन के मिले।

गीतकार : लल्लन प्रसाद ठाकुर
संगीतकार लल्लन प्रसाद ठाकुर

Sunday, February 5, 2012

हे रे चन्दा


"हे रे चन्दा"

हे रे चन्दा लेने जो सनेस पिया परदेश रे..........चन्दा....।

तोहें ने उगै छ आन्हर राति
बिसरल रहै छी पिया केर पांति
तोंहे जाँ उगै छ दीया बाती दीया बाती
होइये मोन मे कलेश रे ...........चन्दा...... ।

हम्मर दुःख केयो ने बुझैया
कोना ओ रहै छथि केयो ने कहैया
कहियौन्ह विकल छैन्ह हुनकर दासी हुनकर दासी
रुसल किए छथि महेश रे ...........चन्दा....... ।

पांति हुनके आजु गाबय छी
छवि में हुनके लीन रहय छी
धैर्य नहि आब बसल उदासी बसल उदासी
नहि अछि कोनो उदेश रे...............चन्दा रे..........चन्दा

बहुत जतन सँ ह्रदय के बुझलहुं  
नहि दोसर के हम किछु कहलहुं
आस बनल अछि नहि हम बिसरि नहि हम बिसरि
चाहि एतबहि, नय किछुओ बिशेष रे.........चन्दा

जहिया मँगलहुं एतबे मँगलहुं
सँग रही बस एतबे चाहलहुं
जनम भरक दुःख कही केकरा सँ कही केकरा सँ
गेलैथ ओ एहेन बिदेश रे...................चन्दा

-लल्लन प्रसाद ठाकुर-