Monday, April 6, 2009

सभागाछी सौराठ (कव्वाली, दोसर कड़ी)


एकटा बsरक बाप सब साल अपन बेटा के लs कs सौराठ सभा जायत छथि मुदा ओहिना आपस भs जायत छथि।विवाह नहि भs पबैत छैन्ह।बsर के इ नीक नय लागैत छैन्ह। इ ओहि बरक व्यथा छैन्ह। :



सभागाछी सौराठ

बsर - आ ...आ...आ...
चारिम बरख थिक जे आपस जायब ,
जायब जं आपस त फेर नय आयब
सुनि लिय बाबू यो सुन लिय भैया ,
जतबो भेटैया नय भेटत रुपैया
मुदा हमरे ....तs हमरे करम कियाक एहेन भs गेल ......२

सब - चारि बेर एला बियाहे नय भेल .........2
पिता - आ ....आ....आ....अगुताउ जुनि,घबराऊ जुनि
अगुताउ जुनि घबराऊ जुनि हेबे करत ,
क्यो नय क्यो माल देबे करत ....2
बौआ एकरे कहे छय कर्मक खेल,
कहेनो ठाम कोना दिय ढकेल,
अगुताउ जुनि ......................................माल देबे करत....
सहयोगी - मुदा हिनके .......मुदा हिनके करम .....बियाहे नय भेल.....२
बsर - कोना नय अगुताइ अहिं सब कहू,
तिसम बरख वयस अछि, आब कते दिन असगर रहू ।
चतुर्थिक सौजन स्वप्न बनल जाइत अछि ,
छप्पन तरहक व्यंजन कोना लोक खाइत अछि,
बाबू अहांक गप्प आब नय सोहाइत अछि ,
हाय रे हमर करम नय जानि कतs ओ बौआयति अछि।
सहयोगी- मुदा हिनके ...............बियाहे नय भेल ..........२
बsर - कहलियै करम के रे कहने तो आन,
आंखि से आन्हर हो कि बहिर हो कान,
कहेनो तो देबैं सब अछि कबूल,
पैर सs नांगुर हो वा हो कोनो लूल,
मुदा हमरे ........................................ बियाहे नय भेल......१
सहयोगी- मुदा हिनके ........................बियाहे नय भेल.......२
पिता - एतेक जे अगुतायल छी जे आन्हर बहिर,
जेहेन तहेन कनियाँ चाहैत छी,
जीबैत जीबैत जाँ नर्क भोगs चाहैत छी,
तs उढ़डि जाउ ककरो संग,
हमरा किछु नय कहू,
बुझि लिय जे बाप मरि गेला,माय मरि गेली
ओकरे संग कतौ जा कs रहू ..............
सहयोगी - मुदा हिनके ...............बियाहे नय भेल-.....२
पिता - आ.........आ.......आ..........
हमारा सs पैघ शुभ चिन्तक के भs सकैत अछि
जे टाकाक संग -संग नीक लोक नीक घsर तकैत अछि
आ.....आ....ससुर एहेन जे खूब मालदार हो,
कोनो छोट मोट थानाक हवालदार हो।
एक अदद मात्र दुलरुआ सार हो,
सुंदर सुंदर सारिक जतय भरमार हो .....
सहयोगी- मुदा हिनके ...............................बियाहे नय भेल......२
बsर - मुदा हमरे .......................................बियाहे नय भेल ......२
पिता - सासु अहांक चलवा फिरवा में लाचार हो,
अहींक कनियाँक हाथ में घरक सब कारोबार हो,
कहैत छियैन्ह भगवान् के जल्दी पठा दिय,
जेकरा लग रुपैया पचास हजार हो ....
बsर - आ....आ....बाप हमर खुश होथि
आ ...स्वप्न हमर साकार हो
मुदा हमरे ....................................................बियाहे नय भेल ...२
सहयोगी - मुद्दा हिनके ..................................बियाहे नय भेल....२
(एक घटकक प्रवेश )

बsर - बाबू..... बाबू...कियो आबि रहल अछि,
बचि कs ई जा नय पाबय
सभा सेहो आब उठि रहल अछि,
आबि रहल अछि....बाबू.... ... आबि रहल अछि।
पिता - चोप ...चोप गधा चोप ....
घटक - नमस्कार
पिता - चोप
घटक - की?
पिता - नमस्कार
घटक - हे हे हे हे नमस्कार ......नमस्कार
की पढ़ल छी ?
पिता - ABCD
घटक - की करय छी ?
बsर - EFGH
घटक - हूँ ....हूँ....कतेक टाका...?
पिता - पचास हजार .....
घटक - बाप रे बाप ......बहुत महग अछि .....
बहुत महग अछि .......बाप रे बाप ...बाप रे बाप ...(प्रस्थान )
बsर - इहो चलि गेल .....सभा उठी गेल ....
प्राण पर हमर बनल बाबू ......अहांक लेल खेल ....
सहयोगी - इहो चलि गेल .....सभा उठि गेल,
प्राण पर हिनक बनल अहांक लेल खेल ...
इहो चलि गेल .....
पिता - चोप ...चोप....गधा चोप ......
बsर - तमसाउ जुनि,.... खिसाउ जुनि ...
तमसाउ जुनि , खिसिआउ जुनि बाप हमर .....
क्यो नय फंसैया की ई दोख हमर.....२
कनियाँ ............हे ये कनियाँ कतय छी हमर हुजूर ....
लोक तकैत अछि बsर के हम तकय छी ससुर ...
सहयोगी - कनियाँ...हे यै कनियाँ कत छी हमर हजूर
लोक तकैत अछि बsर के ई तकै छथि ससुर ....ई तकै छथि ससुर .... ।


गीतकार : लल्लन प्रसाद ठाकुर
संगीतकार : लल्लन प्रसाद ठाकुर ठाकुर









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