Monday, April 6, 2009

घटकैती (पहिल कड़ी)

"श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर" रचित कव्वाली जे कि तीन श्रृंखला में छैक, आ गीत नाटिका के रूप में प्रस्तुत कायल जा सकैत अछि :

1-ghatakaiti (घटकैती)
2-sabhagachhi(सभागाछी)
3-sadhunama(साढूनामा)



घटकैती :

एक व्यक्ति अपन बेटा के लs कs सौराठ सभा जायत छथि। ओ घटकैती कोना करैत छथि से अहि गीत नाटिका में छैक। :


घटकैती


घटक- पॉँच हजार
पिता - नय।
घटक - दस हजार
पिता - नय नय।
घटक - बीस हजार
पिता - कनि आगू बढू।
घटक - पचीस हजार
पिता -हाँ ........
पिता - अपने एलियै तकरे विचारि कs
पच्चिसे पर हम कहलहुं हाँ,
हमरा बौआ सन क्यो नय मिथिला में
दियो लs कs ताकब जं।
मैट्रिक पढ़लकय, आई ए केलकय,
सोँचलों विवाह कs दियै त।
ससुर पढोथिन, नोकरी दिओथिन
बेटी सs अपन स्नेह हेतैन्ह जओं,
पच्चिसे पर तैं कहलौं हाँ ।

घटक - आगू पढेबय नोकरी दिएबय,
हमरे ऊपर में भार हेतय जं।
अपने की केलियय,
कोन बाघ मारलियय,
बौआ के सिर्फ़ जन्मेला सs।
एतेक टका के मांग करयछी,
सोचियो कने तs अपने सs।
माथ में दर्द कोनाक होइछय,
बुझतीये होइत बेटी जं।,
मानि जइयो कने कम्मे सं........।
पॉँच हजार ................................2

पिता - हम की केलियय,
कोन खर्च केलियय,
तकर हिसाब देखबय जं।
हॉस्पिटलक खर्चा दूधक पाई,
मास्टर स्कूल के दिलियय जे।
लमनचूस किताब आ कोपी,
हजार हजार के किनलौं जे।
आ बौआ के माय के कष्ट जे भेलैंह,
तकर हिसाब करतय के ।
पच्चिसे पर हम कहलों हाँ ..............२
घटक - अपने महान अर्थशास्त्रक विद्वान,
सबटा हिसाब जोड़ने छी।
हमर सलाह मानि लिय,
आब जे हम कहय छी।
अपनहूँ माय के कष्ट भेल हेतैन्ह,
अपनहूँ के जनमेवा में।
तकरो हिसाब जोड़ी लिय,
बेटा के सूली चढेबा में।
गप्प बेकार , जी सरकार,
हमरा बूते नय लागत पार,
अपने के बडका व्यापार,
हम चलैत छी नमस्कार....नमस्कार ......... ।

गीतकार : लल्लन प्रसाद ठाकुर
संगीतकार : लल्लन प्रसाद ठाकुर




2 comments:

prabandha said...

S,A- PREM NAMASKAAR LALLAN JI
apanek likhal '' GHATKAITI '' nik lagal ehik lel apanek DHANYAWAAD. lekin apane je bich me ''ANGREJI'' shabda jori deliye ''REPEAT '' se nik nahi lagal.
PRABANDHA KUMAR SINGH
KATMA
MANIGACHI
DARBHANGA

Guddo's corner said...

Didi ,
This reminded me ....many more .
Amazing !!!!